हम में से ज़्यादातर लोग FD की दरों की तुलना में घंटों लगाते हैं और फॉर्म के नॉमिनेशन वाले हिस्से पर मुश्किल से दस सेकंड — वह भी तब, जब उसे भरते हैं। जबकि यही एक लाइन तय करती है कि आपके परिवार को पैसा करीब दो हफ्ते में मिलेगा, या वे महीनों तक हलफनामे, इंडेम्निटी बॉन्ड और अदालती कागज़ जुटाते रहेंगे।
नियम काफी बदल गए हैं। 1 नवंबर 2025 से बैंक एक जमा पर चार नॉमिनी तक जोड़ने देते हैं। और RBI के संशोधित क्लेम-सेटलमेंट नियमों के तहत — जिन्हें बैंकों को 31 मार्च 2026 तक लागू करना था — दस्तावेज़ मिलने के 15 दिन के भीतर डेथ क्लेम निपटाना ज़रूरी है। यह गाइड नॉमिनेशन, जॉइंट FD और क्लेम प्रक्रिया को आसान भाषा में समझाती है।
📑 विषय सूची
- FD नॉमिनेशन क्या है — और यह क्यों ज़रूरी है
- नया नियम: एक FD पर 4 नॉमिनी तक
- जॉइंट FD — सही ऑपरेटिंग मोड कैसे चुनें
- नॉमिनी बनाम जॉइंट होल्डर बनाम कानूनी वारिस
- जमाकर्ता की मृत्यु के बाद FD क्लेम कैसे करें
- नॉमिनी नहीं है? ₹15 लाख वाला आसान रास्ता
- जमाकर्ता की मृत्यु के बाद ब्याज, पेनल्टी और टैक्स
- नॉमिनी कैसे जोड़ें या बदलें
- स्मार्ट टिप्स
- अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
1. FD नॉमिनेशन क्या है — और यह क्यों ज़रूरी है
नॉमिनेशन बैंक को दिया गया आपका निर्देश है: "अगर मेरी मृत्यु हो जाए, तो यह FD इस व्यक्ति को दे दी जाए।" नॉमिनी कोई भी व्यक्ति हो सकता है — जीवनसाथी, बच्चा, माता-पिता, भाई-बहन या कोई दोस्त भी। इसमें कोई खर्च नहीं लगता, दो-चार मिनट लगते हैं, और इसे आप जितनी बार चाहें बदल सकते हैं।
रिकॉर्ड में वैध नॉमिनेशन हो, तो बैंक एक साधारण क्लेम फॉर्म, मृत्यु प्रमाणपत्र और नॉमिनी के पहचान प्रमाण पर पैसा जारी कर सकता है — न उत्तराधिकार प्रमाणपत्र, न कोर्ट का आदेश, न कोई ज़मानतदार।
2. नया नियम: एक FD पर 4 नॉमिनी तक
अक्टूबर 2025 तक आप एक जमा पर सिर्फ एक नॉमिनी रख सकते थे। बैंकिंग कानून (संशोधन) अधिनियम, 2025 ने इसे बदल दिया। 1 नवंबर 2025 से आप चार नॉमिनी तक रख सकते हैं, दो में से किसी एक तरीके से:
| विशेषता | एक साथ (Simultaneous) नॉमिनेशन | क्रमिक (Successive) नॉमिनेशन |
|---|---|---|
| कैसे काम करता है | सभी नॉमिनी आपके तय किए प्रतिशत में पैसा बांटते हैं | नॉमिनी 1 से 4 के क्रम में होते हैं; पैसा उनमें से केवल एक को मिलता है |
| हिस्सा | आप तय करते हैं — कुल जोड़ 100% होना चाहिए | क्रम में पहले जीवित नॉमिनी को 100% मिलता है |
| किसके लिए बेहतर | जीवनसाथी और बच्चों में पैसा बांटने के लिए | पहली पसंद के न रहने की स्थिति में बैकअप रखने के लिए |
| कहां उपलब्ध | जमा खाते, FD सहित | जमा खाते; बैंक लॉकर के लिए केवल यही तरीका मान्य है |
उदाहरण: ₹12 लाख की FD, दो तरह से नॉमिनेशन
मान लीजिए रमेश की ₹12 लाख की FD है और वे अपनी पत्नी सुनीता, बेटे अमन और बेटी रिया के लिए इंतज़ाम करना चाहते हैं।
🤝 एक साथ
- सुनीता — 50% → ₹6,00,000
- अमन — 25% → ₹3,00,000
- रिया — 25% → ₹3,00,000
- हर एक को उसका हिस्सा सीधे मिलता है
🔢 क्रमिक
- पहला: सुनीता को पूरे ₹12,00,000
- दूसरा: अमन — केवल तब, जब सुनीता न रहें
- तीसरा: रिया — केवल तब, जब दोनों न रहें
- भुगतान केवल एक व्यक्ति को होता है
* समझाने के लिए केवल मूलधन दिखाया गया है। FD पर देय ब्याज भी नॉमिनी को इसी अनुपात में मिलता है।
चार नॉमिनी का नियम बैंक जमाओं पर लागू है। कंपनी (NBFC) FD और पोस्ट ऑफिस जमाओं के नॉमिनेशन नियम अलग होते हैं, इसलिए बुक करने से पहले आवेदन फॉर्म ज़रूर पढ़ें।
3. जॉइंट FD — सही ऑपरेटिंग मोड कैसे चुनें
जॉइंट FD दो या ज़्यादा लोगों के नाम पर होती है। सबसे अहम है वह ऑपरेटिंग निर्देश जो आप फॉर्म पर चुनते हैं, क्योंकि वही तय करता है कि पैसा कौन निकाल सकता है — अभी भी और किसी की मृत्यु के बाद भी।
| मोड | सबके जीवित रहते कौन ऑपरेट करता है | एक होल्डर की मृत्यु पर |
|---|---|---|
| Either or Survivor | कोई भी एक होल्डर | जीवित होल्डर को FD मिलती है |
| Former or Survivor | केवल पहला होल्डर | दूसरे होल्डर को मिलती है — लेकिन पहले होल्डर की मृत्यु के बाद ही |
| Anyone or Survivor(s) (3+ होल्डर) | कोई भी एक होल्डर | जीवित होल्डर जारी रखते हैं |
| Jointly | सभी होल्डरों को साथ में साइन करना होता है | सर्वाइवरशिप नहीं — जीवित होल्डर और मृतक के कानूनी वारिसों को मिलकर क्लेम करना होता है |
ज़्यादातर दंपतियों के लिए Either or Survivor सबसे व्यावहारिक विकल्प है। Former or Survivor उन माता-पिता के लिए ठीक है जो जीवन भर पूरा नियंत्रण अपने पास रखना चाहते हैं, पर चाहते हैं कि बाद में पैसा बच्चे को मिले।
टैक्स को लेकर दो बातें याद रखें: जॉइंट FD का ब्याज और TDS पहले होल्डर के PAN पर दर्ज होता है, और टैक्स-सेविंग FD में धारा 80C की कटौती केवल पहला होल्डर ले सकता है।
4. नॉमिनी बनाम जॉइंट होल्डर बनाम कानूनी वारिस
👤 नॉमिनी
- FD पर आप खुद नामित करते हैं
- आपकी मृत्यु के बाद बैंक से पैसा प्राप्त करता है
- पैसा ट्रस्टी के तौर पर रखता है — अपने आप मालिक नहीं बनता
- आपके जीवनकाल में कोई अधिकार नहीं
👥 जॉइंट होल्डर
- FD पर ही सह-धारक के रूप में नाम दर्ज
- चुने गए मोड के अनुसार FD ऑपरेट कर सकता है
- सर्वाइवरशिप क्लॉज़ के तहत पैसा पाता है
- ब्याज पहले होल्डर के PAN पर दर्ज होता है
⚖️ कानूनी वारिस
- आपकी वसीयत या उत्तराधिकार कानून से तय होता है
- पैसे का अंतिम मालिक
- नॉमिनी न हो, तो दस्तावेज़ों से अपना दावा साबित करना पड़ता है
- नॉमिनी से अपना हिस्सा मांग सकता है
5. जमाकर्ता की मृत्यु के बाद FD क्लेम कैसे करें
अगर FD में नॉमिनी या सर्वाइवरशिप क्लॉज़ है, तो प्रक्रिया छोटी है:
बैंक को सूचित करें
शाखा जाएं — कई बैंक यह काम ऑनलाइन भी लेते हैं — और मृत्यु की जानकारी दें। डेथ-क्लेम फॉर्म मांगें।
तीन बुनियादी दस्तावेज़ जमा करें
क्लेम फॉर्म, मृत्यु प्रमाणपत्र की कॉपी, और दावेदार का पहचान व पते का प्रमाण। रिकॉर्ड में नॉमिनी या सर्वाइवर हो, तो बैंक को उत्तराधिकार प्रमाणपत्र, कोर्ट का आदेश या तीसरे पक्ष की ज़मानत नहीं मांगनी चाहिए।
तय करें: अभी बंद करें या जारी रखें
आप FD तुरंत बंद करा सकते हैं — जमाकर्ता की मृत्यु के बाद बैंकों को बिना किसी पेनल्टी के समय से पहले बंद करने देना होता है। जीवित जॉइंट होल्डर आम तौर पर FD को मैच्योरिटी तक चलने भी दे सकता है। बैंक से पूछें कि वह कौन-से विकल्प देता है।
पैसा प्राप्त करें
बैंक राशि दावेदार के खाते में जमा करता है। RBI के नियमों के तहत, सभी दस्तावेज़ मिलने के 15 कैलेंडर दिनों के भीतर क्लेम निपटाना ज़रूरी है।
6. नॉमिनी नहीं है? ₹15 लाख वाला आसान रास्ता
अगर न नॉमिनी है और न सर्वाइवरशिप क्लॉज़, तो क्लेम कानूनी वारिसों को करना पड़ता है। छोटी रकम के लिए RBI ने इसे आसान बनाया है:
| स्थिति | बैंक क्या मांगता है |
|---|---|
| नॉमिनी या सर्वाइवर रिकॉर्ड में है | क्लेम फॉर्म, मृत्यु प्रमाणपत्र और दावेदार का पहचान प्रमाण |
| नॉमिनी नहीं — ₹15 लाख तक का क्लेम (सहकारी बैंकों में ₹5 लाख) | ऊपर के सभी दस्तावेज़, साथ में इंडेम्निटी बॉन्ड, बाकी कानूनी वारिसों का अनापत्ति या डिस्क्लेमर पत्र, और कानूनी वारिस प्रमाणपत्र या परिवार को जानने वाले किसी स्वतंत्र व्यक्ति की घोषणा। तीसरे पक्ष की ज़मानत नहीं। |
| नॉमिनी नहीं — सीमा से ऊपर का क्लेम | उत्तराधिकार प्रमाणपत्र, कानूनी वारिस प्रमाणपत्र या ऐसे ही कानूनी दस्तावेज़ (वसीयत हो तो प्रोबेट)। बैंक ज़मानत भी मांग सकता है। |
आसान रास्ते में भी हर वारिस से अनापत्ति पत्र लेने में हफ्ते लग सकते हैं — और कोर्ट से उत्तराधिकार प्रमाणपत्र लेने में महीने और पैसे दोनों लगते हैं। नॉमिनेशन इन सबसे बचा देता है।
7. जमाकर्ता की मृत्यु के बाद ब्याज, पेनल्टी और टैक्स
RBI के नियम यह पक्का करते हैं कि मृत्यु के कारण परिवार को ब्याज का नुकसान न हो:
| स्थिति | बैंक कितना ब्याज देता है |
|---|---|
| जमाकर्ता की मृत्यु के बाद FD मैच्योरिटी से पहले बंद की गई | जितनी अवधि FD असल में चली, उस अवधि पर लागू दर — कोई पेनल्टी नहीं |
| मृत्यु मैच्योरिटी से पहले हुई, क्लेम मैच्योरिटी के बाद किया गया | मैच्योरिटी तक तय दर, फिर अतिरिक्त अवधि के लिए मैच्योरिटी की तारीख पर लागू दर से साधारण ब्याज |
| मृत्यु FD के मैच्योर हो जाने के बाद हुई | मैच्योरिटी की तारीख से भुगतान तक बचत खाते की दर |
टैक्स की बात: नॉमिनी या वारिस को मिलने वाला पैसा विरासत है, आय नहीं — भारत में विरासत कर नहीं है। ब्याज का मामला अलग है। मृत्यु की तारीख तक कमाया गया ब्याज मृतक के अंतिम आयकर रिटर्न में जाता है (जिसे कानूनी वारिस भरता है), जबकि उसके बाद का ब्याज उस व्यक्ति की आय में गिना जाता है जिसे वह मिलता है। दावेदार का PAN बैंक को जल्दी दे दें, ताकि TDS सही व्यक्ति के नाम पर जमा हो।
8. नॉमिनी कैसे जोड़ें या बदलें
अपनी मौजूदा FD जांचें
हर FD रसीद पर या नेट बैंकिंग में "Nomination Registered" और नॉमिनी का नाम देखें। पुरानी FD में अक्सर कोई नॉमिनी नहीं होता।
जोड़ें या अपडेट करें — ऑनलाइन या शाखा में
ज़्यादातर बैंकों के नेट बैंकिंग या मोबाइल ऐप में नॉमिनेशन का विकल्प होता है। नहीं तो अपनी शाखा में नॉमिनेशन फॉर्म भरें। इसका कोई शुल्क नहीं है।
तरीका चुनें
एक नॉमिनी, या चार तक — प्रतिशत हिस्सों के साथ (एक साथ) या प्राथमिकता के क्रम में (क्रमिक)।
अगर नॉमिनी नाबालिग है
एक वयस्क का नाम भी दें, जो बच्चे के नाबालिग रहते आपकी मृत्यु होने पर उसकी ओर से पैसा प्राप्त करेगा।
पावती संभालकर रखें
बैंक को तीन कार्य दिवसों में आपके अनुरोध की पावती देनी होती है। इसे FD के कागज़ों के साथ रखें और परिवार को बताएं कि वे कहां रखे हैं।
9. स्मार्ट टिप्स
हर FD अलग से जांचें
यह न मान लें कि बचत खाते का नॉमिनी आपकी जमाओं पर भी लागू है। हर FD पर नॉमिनी की पुष्टि करें।
जीवन की बड़ी घटनाओं के बाद समीक्षा करें
शादी, बच्चे का जन्म, तलाक या परिवार में मृत्यु — हर मौके पर नॉमिनी दोबारा देखें।
वसीयत से मिलान रखें
वसीयत और नॉमिनेशन में एक जैसे नाम रखें, ताकि बाद में किसी को बहस न करनी पड़े।
जॉइंट FD से बीमा कवर बढ़ता है
एक ही बैंक में व्यक्तिगत FD और जॉइंट FD को ₹5 लाख का अलग-अलग कवर मिलता है। हमारी DICGC बीमा गाइड देखें।
परिवार के लिए सूची रखें
हर जमा का बैंक, FD नंबर, मैच्योरिटी की तारीख और नॉमिनी लिखकर रखें। जिस जमा का परिवार को पता ही नहीं, उसका क्लेम वह नहीं कर सकता।
वरिष्ठ नागरिक: दोनों अपनाएं
जीवनसाथी के साथ Either or Survivor FD और बच्चे को नॉमिनी — यह लगभग हर स्थिति संभाल लेता है। हमारी वरिष्ठ नागरिक FD गाइड पढ़ें।
10. अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
🏦 अपनी अगली FD सही तरीके से बुक करें — बेहतरीन दर, नॉमिनी के साथ
40+ बैंकों और NBFC की FD दरों की तुलना करें, और बुक करते समय ही नॉमिनी जोड़ें।
FD दरें तुलना करें →अस्वीकरण: यह लेख केवल जानकारी के लिए है और कानूनी, निवेश या टैक्स सलाह नहीं है। नॉमिनेशन और क्लेम-सेटलमेंट के नियम बैंकिंग कानून (संशोधन) अधिनियम, 2025 और RBI के निर्देशों के तहत अक्टूबर 2026 में बैंकों पर लागू स्थिति के अनुसार हैं; अलग-अलग बैंकों के फॉर्म, सीमाएं और प्रक्रियाएं अलग हो सकती हैं, और NBFC व पोस्ट ऑफिस जमाओं पर अलग नियम लागू होते हैं। अंत में विरासत किसे मिलेगी, यह आपकी वसीयत और आप पर लागू उत्तराधिकार कानून पर निर्भर करता है। निर्णय लेने से पहले अपने बैंक से पुष्टि करें और किसी योग्य कानूनी या टैक्स सलाहकार से परामर्श करें।
By Pramod Kumar · B.Tech NIT Nagpur | M.Tech IIT Roorkee | Founder, BookmyFD · 6 अक्टूबर 2026 | 9 मिनट रीड